New
AROGYA SEVA KENDRA - Free Health Consultation - Click Here to Know More | BIMA BHAROSA - An Integrated Grievance Management System to facilitate policyholders and complainants - Click here to know more | Click here to link your KYC | Policies where the risk commencement date is on or after 1st October 2024, all the policy servicing shall be as per the IRDAI (Insurance Products) Regulations, 2024 dated 20th March 2024 and Master Circular on Health Insurance Business dated 29th May 2024

हेल्थ इंश्योरेंस में शुरुआती मंजूरी (इनिशियल अप्रूवल ) क्या है?

India +91

स्वास्थ्य बीमा में प्रारंभिक स्वीकृति की भूमिका

 

आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि अस्पताल में भर्ती होने के समय आप सीधे पूरा क्लेम सेटल नहीं कर सकते या तुरंत भुगतान नहीं पा सकते। इसमें पहला स्टेप होता है इनिशियल अप्रूवल। यहाँ हॉस्पिटल आपकी जानकारी आपके इंश्योरेंस कंपनी को भेजती है। यह प्रक्रिया कुछ सरल चरणों में पूरी हो जाती है और आपके इलाज में देरी नहीं होने देती। चिंता करने की बात नहीं है क्योंकि बिल्कुल आसान भाषा में इंश्योरेंस क्लेम करने का पहला स्टेप आपको कुछ ही मिनटों में समझ आ जाएगा।

 

इनिशियल अप्रूवल क्या है?

 

जब भी आप कैशलेस इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने वाले होते हैं तब आपका चुना हुआ अस्पताल आपकी बीमा कंपनी को एक रीक्वेस्ट फ़ॉर्म भेजती है। मतलब बिना पैसों के आपके इलाज के लिए अनुमति मांगती है। इसे प्रीऑथराइज़ेशन, प्रीसर्टिफ़िकेशन, प्रीडिटरमिनेशन और प्रीअप्रूवल भी कहा जाता है। ऐसा सर्जरी, महंगे टेस्ट, विशेष उपचार के लिए किया जाता है। अस्पताल  मरीज़ से जुड़ी जानकारी बीमा कंपनी को देकर उनसे इलाज शुरू करने की अनुमति मांगती है। यह एक अस्थायी मंजूरी होती है। इसका मतलब ये फाइनल सेटल्मन्ट नहीं है।

 

इनिशियल अप्रूवल क्यों होता है?

 

जब हॉस्पिटल बीमा कंपनी से इलाज की अनुमति मांगती है तब ये सुनिश्चित हो जाता है की आपका इलाज पॉलिसी में कवर हो रहा है और अस्पताल को बिल के भुगतान की गारंटी भी मिल जाती है। इसमें लगभग होने वाले खर्च की भी जानकारी मिल जाती है। साथ ही इंश्योरेंस कंपनी किसी भी तरह की धोखाधड़ी जैसे झूठे हॉस्पिटलाइजेशन, गलत क्लेम और बाकी खर्चों से बच जाती है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस में शुरुआती मंजूरी (Initial Approval) कैसे मिलती है?

 

इनिशियल अप्रूवल की प्रक्रिया सरल है, बस आपके पास सभी डॉक्युमेंट्स होने चाहिए।

 

  • प्री-इंटिमेशन- अगर आपका इलाज पहले से तय है तो कम से कम 48 घंटे पहले और इमरजेंसी केस में भर्ती होने के 48 घंटे के अंदर अपने इंश्योरर/TPA को सूचित करना होता है।
  • हॉस्पिटलाइजेशन- अस्पताल में आप अपना पहचान पत्र, पॉलिसी की जानकारी, अस्पताल में भर्ती होने का नोट, टेस्ट रिपोर्ट, अगर एक्सीडेंट हुआ हो तो MLC और पुलिस केस होने पर FIR, ये सभी अस्पताल के साथ साझा करें।
  • कैशलेस रिक्वेस्ट फॉर्म- अस्पताल का इंश्योरेंस डेस्क आपकी पॉलिसी की जांच करता है जैसे पॉलिसी शुरू है या नहीं, वेटिंग पीरियड, इत्यादि। उसके बाद मेडिकल दस्तावेज़, इलाज का कारण, होने वाला खर्च जैसी जानकारी प्रीऑथराइज़ेशन फ़ॉर्म में भरकर कैशलेस इलाज शुरू करने की अनुमति इंश्योरेंस कंपनी से मांगती है।
  • TPA (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) / बीमा कंपनी - TPA या बीमा कंपनी अस्पताल से प्राप्त जानकारी के आधार पर पॉलिसी की शर्तें, कवरेज और खर्च जांचती है। सही पाए जाने पर शुरुआती रकम मंजूर करती है, जिससे कैशलेस इलाज शुरू हो जाता है।

 

नई IRDAI गाइडलाइंस

 

IRDAI ने जनवरी 2024 से कैशलेस एवरीवेयर नियम लागू किया गया है। यानि अब नॉन- नेटवर्क अस्पताल में भी कैशलेस सुविधा उपलब्ध की जाएंगी। बशर्ते आप इलाज के कम से कम 48 घंटे पहले या इमरजेंसी में 48 घंटे के अंदर बीमा कंपनी को सूचित करें।

 

नया नियम ये भी कहता है की इंश्योरेंस कंपनी को 1 घंटे के अंदर कैशलेस अप्रूवल देना होता है। साथ ही इलाज के बाद जब हॉस्पिटल बिल भेजे तो उन्हें 3 घंटे के अंदर क्लेम सेटल्मेंट करना होगा।

 

इनिशियल अप्रूवल के फ़ायदे और नुकसान

 

फ़ायदे-

  • इसका सबसे बाद फ़ायदा ये है की बिना अपने जेब से खर्च किए आपका कैशलेस इलाज शुरू हो सकता है।
  • हॉस्पिटल को उसका भुगतान मिलने का भरोसा होता है।
  • बीमा कंपनी गलत या फर्जी दावों से बच जाती हैक्योंकि हॉस्पिटल उन्हें सटीक जानकारी देता है।
  • आपको हॉस्पिटल में होने वाले खर्च की जानकारी मिलती है जिससे आप पर अनावश्यक खर्च का बोझ नहीं पड़ता।

नुकसान-

  • दस्तावेज़ों की कमी के कारण कई बार मंजूरी मिलने में देरी हो सकती है जिससे इलाज में देरी हो सकती है।
  • ये सिर्फप्रारंभिक अनुमति होती है, फाइनल सेटलमेंट नहीं।
  • अगर बीमारी पॉलिसी की शर्तों में कवर ना हो तो अप्रूवल रद्द भी हो सकता है।
  • पॉलिसी में शामिल न होने वाले (एक्सक्लूज़न) खर्चों का भुगतान आपको खुद करना पड़ेगा।

 

इसलिए सभी से अनुरोध है की ज़रूरी दस्तावेज़ हमेशा संभालकर रखें, साथ ही ज़रूरत पड़ने पर अपनी जेब से खर्च होने की भी तैयारी रखें। ताकि आपके इलाज में देरी ना हो।

 

निष्कर्ष

 

इनिशियल अप्रूवल कैशलेस इलाज की ओर एक अहम कदम है। इससे आपका बिना किसी चिंता के इलाज होता है। बीमा कंपनी और हॉस्पिटल भी आर्थिक नुकसान से बचता है। लेकिन इस बात को याद रखें की ये फाइनल अप्रूवल नहीं है। इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं। आपका क्लेम खारिज ना हो इसके लिए ज़रूरी दस्तावेज़ साथ रखें।  

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इलाज शुरू होने से पहले हॉस्पिटल इंश्योरेंस कंपनी से कैशलेस इलाज की अनुमति की मांग करती है। इसे इनिशियल अप्रूवल कहते है।

इनिशियल अप्रूवल बिना अपना पैसा खर्च किए इलाज शुरू करने के लिए ज़रूरी है। इसमें सिर्फ कुछ रकम का भुगतान किया जाता है। फाइनल अप्रूवल इलाज खत्म होने के 3 घंटे में किया जाता है। इसमें पूरे इलाज का खर्च कंपनी देती है।

भले ही IRDAI के नियम के मुताबिक सभी हॉस्पिटल में कैशलेस सुविधा उपलब्ध की जाएंगी। लेकिन हर अस्पताल के लिए ये करना थोड़ा मुश्किल है। ऐसे में पहले आपको भुगतान करना होता है और फिर रीइंबर्समेंट क्लेम करना होता है।

सभी दस्तावेज़ जमा करने पर IRDAI के नियमानुसार 1 घंटे के अंदर अप्रूवल देना ज़रूरी है।

हाँ,अगर झूठी या अधूरी जानकारी दि गई हो तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

Still choosing the right health plan?

We're here to guide you.

Mobile Banner
DISCLAIMER:
Health Insurance Coverage for pre-existing medical conditions is subject to underwriting review and may involve additional requirements, loadings, or exclusions. Please disclose your medical history in the proposal form for a personalised assessment.
This FAQ page contains information for general purpose only and has no medical or legal advice. For any personalized advice, do refer company's policy documents or consult a licensed health insurance agent. T & C apply. For further detailed information or inquiries, feel free to reach out via email at marketing.d2c@starhealth.in