हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय कौन से मेडिकल टेस्ट कराने होते हैं?
प्री- मेडिकल टेस्ट क्यों जरूरी हैं और इनमें क्या- क्या जांच होती है
जब आप हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते हैं, तो ज्यादातर बीमा कंपनियां कुछ ज़रूरी मेडिकल टेस्ट करवाती हैं। इन्हें प्री-मेडिकल टेस्ट कहा जाता है। ये टेस्ट बिल्कुल आम और बेसिक होते हैं, जिनसे बीमा कंपनी को आपके वर्तमान स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है।
इसलिए अगर आप नया हेल्थ इंश्योरेंस ले रहे हैं या पॉलिसी को अपग्रेड करना चाहते हैं, तो इन प्री-मेडिकल टेस्ट्स को पूरा करना आपके लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इससे आपका दावे की अस्वीकृति का जोखिम काफी कम हो जाता है।
मेडिकल टेस्ट किसे करना होता है?
मेडिकल टेस्ट सभी को करना ज़रूरी नहीं है। ये तब ही ज़रूरी है अगर-
- आपकी उम्र 40-45 से ज़्यादा है।
- पहले कोई गंभीर बीमारी रह चुकी है।
- 10 लाख या उससे ज़्यादा की राशि वाला बीमा चुनते हैं।
- आपकी जीवनशैली सही नहीं है।
प्री-मेडिकल टेस्ट का खर्च कौन उठता है?
IRDAI के अनुसार बीमा कंपनी आपके टेस्ट का कम से कम 50% खर्च उठाती है। ये हर बीमा कंपनी में अलग हो सकता है जैसे कुछ कंपनियाँ पूरा खर्च उठाती हैं। कई बार व्यक्ति को खुद ही पूरा खर्चा उठाना पड़ता है फिर बीमा कंपनी रिइम्बर्स कर देती हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस में मेडिकल टेस्ट ज़रूरी क्यों होती है?
मेडिकल टेस्ट आपके और बीमा कंपनी, दोनों के लिए फायदेमंद है। जैसे-
- सही निर्णय लेने में सहायक- टेस्ट से आपकी सेहत की सटीक जानकारी मिलती है। छुपी हुई या शुरुआती बीमारियों का पता चल सकता है। इससे आपकी ज़रूरत के मुताबिक सही इंश्योरेंस और बीमा रकम चुनने में आसानी होती है।
- क्लेम रीजेक्शन की कम संभावना- मेडिकल टेस्ट होने से बीमा कंपनी को आपकी सेहत की जानकारी पहले से ही होती है।ऐसे में क्लेम के रद्द होने की संभावना कम हो जाती है।
- सही प्रीमियम और कवरेज- आपकी हेल्थ रिपोर्ट को देखते हुए आपके लिए सही कवरेज निर्धारित किया जाता है। अगर आप स्वस्थ हैंतो आपको कम प्रीमियम में बड़ा कवरेज मिल सकता है।
- समय रहते इलाज- बहुत सी बीमारियाँ शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाती हैं। इस टेस्ट से आपको छुपी हुई बीमारी का पता चल जाता है। इससे आप समय रहते इलाज कर सकते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस के लिए होने वाले सामान्य प्री- मेडिकल टेस्ट
यहाँ कुछ टेस्ट दिए गए है जो इंश्योरेंस कंपनी आपको करने के लिए कह सकती है।
- ब्लड टेस्ट-ब्लड टेस्ट से आपकी मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, लिवर/ किडनी फंक्शन, एनीमिया और किसी भी तरह के संक्रमण के बारे में पता लगाया जाता है।
- यूरिन टेस्ट- इससे भी किडनी फंक्शन, असामान्य शुगर लेवल, प्रोटीन और संक्रमण जैसे UTI का पता चलता है।
- ब्लड प्रेशर- ब्लड प्रेशर से कई बीमारियाँ जुड़ी हुई है। इसलिए आपके ब्लड प्रेशर को जानना ज़रूरी हो जाता है।
- इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG)-इससे दिल की समस्या जैसे धड़कन का बहुत तेज़ या धीमा होना, आर्टरी ब्लॉकेज की जांच की जाती है। ये खासकर उनके लिए होता है जिनकी उम्र 45 से ज़्यादा हो या जिन्हें ऐसी कोई समस्या पहले से हो।
- लिपिड प्रॉफ़िल टेस्ट-इस टेस्ट से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा जाँची जाती है जिसके बढ़ने से दिल की बीमारी का जोखिम हो सकता है।
- शुगर टेस्ट- शुगर के लिए अक्सर HbA1c टेस्ट किया जाता है। इससे पिछले 2-3 महीने में खून में शुगर लेवल पता किया जा सकता है। ये मधुमेह पहचानने और मैनेज करने के लिए महत्वपूर्ण टेस्ट है।
- लिवर फंक्शन टेस्ट- जो लोग शराब आदि का सेवन करते हैं या जिन्हें लिवर से जुड़ी परेशानियाँ है उन्हें लिवर फंक्शन टेस्ट की सलाह दि जाती है।
- किडनी फंक्शन टेस्ट- इसे रीनल फंक्शन टेस्ट भी कहा जाता है। इस टेस्ट से पता चलता है की आपकी किडनी कितनी अच्छी तरह से काम कर रही है।
- संक्रमण-बीमा कंपनी कुछ संक्रमणों की जांच भी करती है जैसे HIV, हेपेटाइटिस, टीबी।
- ट्रेडमिल टेस्ट (TMT) या स्ट्रेस टेस्ट-ये हृदय ये जुड़ी टेस्ट है। इसमें व्यक्ति को ट्रेडमिल पर चलने या दौड़ने के लिए कहा जाता है। इस दौरान ECG, हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, नापा जाता है, ये देखने के लिए की तनाव में आपका हृदय कैसे काम करता है।
- छाती का एक्स-रे -सीने का एक्स-रे आपके फेफड़ों के स्वास्थ्य, टीबी, निमोनिया और दिल से जुड़ी बीमारी जानने के लिए लिया जाता है। खासकर उन लोगों के लिए जो धूम्रपान करते हैं।
प्री- मेडिकल टेस्ट के बाद क्या होता है?
टेस्ट रिपोर्ट मिलने के बाद बीमा कंपनी आपकी रिपोर्ट को परखती है। उसके आधार पर प्रीमियम, एक्सक्लूज़न या वेटिंग पीरियड लागू होता है। ज़्यादा जोखिम होने पर पॉलिसी नामंजूर की जा सकती है।
निष्कर्ष
टेस्ट करने से आप अपने स्वास्थ्य और पॉलिसी को लेकर निश्चिंत हो जाते है। इससे दावा रद्द भी नहीं होता। साथ ही वक़्त रहते इलाज होने से आपका परिवार भी आने वाली परेशानियों से बच जाता है। आप जितना स्वस्थ रहेंगे, प्रीमियम उतना ही कम देना पड़ेगा और ज़िंदगी उतनी ही खुलकर जी पाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नहीं, टेस्ट सिर्फ़ उन लोगों के लिए ज़रूरी है जो 40 -45 की उम्र से ऊपर हो, जिन्हें पहले भी कोई बीमारी हो चुकी है या जिन्हें नशा या धूम्रपान करने की आदत है।
ऐसा नहीं है। आपकी बीमारी को देखते हुए पॉलिसी में वेटिंग पीरियड, एक्सक्लूज़न और ज़्यादा प्रीमियम लागू हो सकता है।
आमतौर पर नवीनीकरण पर मेडिकल टेस्ट नहीं होता। लेकिन अगर पॉलिसी लैप्स हुई हो, बहुत लंबा गैप हो, कोई सर्जरी या बीमारी हुई हो या आपकी उम्र ज़्यादा हो तब बीमा कंपनी टेस्ट कराने की सलाह दे सकती है।
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