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हेल्थ इंश्योरेंस में कौन से इलाज कवर नहीं होते?

India +91

स्वास्थ्य बीमा में शामिल न होने वाली बीमारियाँ: महत्वपूर्ण जानकारियां

 

हर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी, IRDAI के नियमों के अनुसार, अपनी पॉलिसी में एक्सक्लूज़न की सूची देती है। अगर अस्पताल में भर्ती की वजह किसी ऐसी बीमारी से जुड़ी हो जो इस सूची में है, तो बीमा कंपनी क्लेम मंजूर नहीं करेगी। इसलिए हेल्थ प्लान लेने से पहले एक्सक्लूज़न की सूची ध्यान से जरूर पढ़ें।

 

हेल्थ इंश्योरेंस में एक्सक्लूज़न जानना क्यों जरूरी है?

 

एक्सक्लूज़न यानी वे खर्चे या इलाज जो इंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करती। इन्हें जानना जरूरी है क्योंकि –

 

  • अचानक खर्चों से बचाव- अगर पता न हो कि कौन से खर्चकवर नहीं हैं, तो ऐन वक़्त पर आपको अपनी जेब से बड़ी रकम देनी पड़ सकती है।
     
  • दावे की अस्वीकृति से बचाव –कई बार लोग पॉलिसी के भरोसे दावा करते हैं, लेकिन एक्सक्लूज़न में आने के कारण वह रिजेक्ट हो जाता है, जिससे आपकी प्लानिंग बिगड़ सकती है।
     
  • सही पॉलिसी चुनने में मदद- जो इलाज सामान्य पॉलिसीमें कवर नहीं होते, वे कई बार ऐड-ऑन कवर या दूसरी पॉलिसी में शामिल होते हैं। एक्सक्लूज़न की जानकारी से आप बेहतर विकल्प चुन सकते हैं।
     
  • बेहतर फ़ाइनेंशियल प्लानिंग- इंश्योरेंस न सिर्फ बड़े मेडिकल बिल से बचाता है बल्कि टैक्स में भी राहत देता है। इसलिए पॉलिसी में क्या कवर है और क्या नहीं, इसकी पूरी जानकारी आपका हक है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस में आमतौर पर कवर नहीं होने वाले इलाज

 

हेल्थ इंश्योरेंस मेडिकल खर्च कवर करता है, लेकिन कुछ इलाज, सर्जरी या हॉस्पिटलाइजेशन को बीमा कंपनियां कवर नहीं करतीं, इन्हें एक्सक्लूज़न कहा जाता है-

 

1. कॉस्मेटिक से जुड़े इलाज

फेसलिफ्ट, लिपोसक्शन और इस प्रकार की प्लास्टिक सर्जरी लोग अपनी पसंद से करते हैं। इसलिए इनका खर्च कंपनी नहीं उठाएगी। यह केवल तब कवर हो सकता है अगर किसी दुर्घटना में रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की ज़रूरत हो।

2. एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट

एक्सपेरिमेंट या ट्रायल के तौर पर की गई सर्जरी को भी कवर नहीं किया जाएगा।

3. दांत, आंख और कान से जुड़ी समस्याएँ

जब तक इनसे जुड़े इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने की ज़रूरत ना हो, इनका खर्च कवर नहीं होगा।

4. बांझपन या प्रजनन संबंधी उपचार

IVF, सरोगेसी, अपनी इच्छा से किया गया अबॉर्शन, ये खर्च कवर नहीं किए जाते हैं। कुछ पॉलिसी में मटर्निटी बेनेफिट लेने केलिए अलग से ऐड ऑन राइडर लेना होता है।

5. लिंग में बदलाव

कॉस्मेटिक की तरह ही ये इलाज अपनी इच्छा से किया जाता है। इसलिए इसका खर्च भी कवर नहीं किया जाता।

6. ट्रांसमिटेड डिसिजेस

AIDS, HIV, सिफलिस, हेपेटाइटिस जैसे संक्रामित रोगों का खर्च कई इंश्योरेंस कंपनियाँ नहीं उठाती।

7. डायग्नॉस्टिक खर्च

आमतौर पर रूटीन टेस्ट जैसे ब्लड टेस्ट, डायबिटीज टेस्ट, इनका खर्च हेल्थ इंश्योरेंस में कवर नहीं होता। लेकिन अगर इनकी ज़रूरत किसी बीमारी के इलाज के लिए है या हॉस्पिटल में भर्ती होने पर ज़रूरी है तो इनका खर्च कवर जरूर होगा।

8. एडवेंचर स्पोर्ट्स

अगर आप पैराजंपिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, माउंटेनियरिंग, स्काईडाइविंग, डीप-सी डाइविंग जैसे स्पोर्ट्स के शौकीन है तो ये जान लें कि इनमें भाग लेने पर होने वाली चोट या बीमारी का खर्चइंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करती।

9. लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ

अगर आपकी अपनी गलत आदतों के चलते आपको कोई बीमारी हो तो उसका इलाज बीमा कंपनी कवर नहीं करेगी। जैसा मोटापा, शराब या तंबाकू से होने वाले कैंसर भी इसमें शामिल हैं।

10. आउटपेशेंट केयर (OPD)

इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन का खर्च तो सभी पॉलिसी करती ही है लेकिन कुछ पॉलिसियों में आउटपेशेंट मतलब जब हॉस्पिटल भर्ती होने की ज़रूरत ना हो तो वो खर्च कवर नहीं होंगे। जैसे डॉक्टर से कंसल्टेशन, प्रिस्क्रिप्शन दवाइयाँ, अस्पताल से बाहर टांके लगवाना।

11. जन्मजात बीमारियाँ/ जेनेटिक डिसऑर्डर

जन्म से ही विकलांग या जन्म से ही जुड़ी बीमारियों का खर्च बीमा कंपनी अक्सर कवर नहीं करती। ये बीमारियाँ जैसे दिल की बीमारी, शरीर के किसी अंग में गड़बड़ी, एक्स्ट्रा त्वचा का बनना, इत्यादि।

12. कन्ज़्यूमेबल / गैर-मेडिकल खर्च

हॉस्पिटल में भर्ती होने पर कई चीजों का इस्तेमाल होता है जैसे सिरिंज, कॉटन, पट्टियाँ, सैनिटाइज़र, मास्क। इन सभी का पैसा अक्सर आपको अपनी जेब से ही भरना होता है। इससे बचने के लिए आप कन्ज़्यूमेबल कवर नाम का ऐड ऑन ले सकते हैं।

13. आत्महत्या, शराब या नशीले पदार्थ

खुद को चोट पहुंचाना जैसे आत्महत्या, शराब और नशे में हुई दुर्घटनाएं, इन सभी से जुड़े इलाज कोई इंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करेगी।

14. प्री-एग्ज़िस्टिंग बीमारियाँ

पॉलिसी लेने से पहले अगर कोई बीमारी है तो उसके लिए वेटिंग पीरियड होता है। उसके खत्म होने के बाद ही कवरेज शुरू होता है।

 

निष्कर्ष

 

इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम लोगों की ज़रूरत को देखते हुए तय किया जाता है। इसलिए इसमें सभी इलाज शामिल नहीं किए जा सकते। कुछ खर्चों के लिए बिल्कुल कवरेज नहीं होता, जबकि कुछ इलाजों या खर्चों के लिए अलग से ऐड-ऑन कवर लिया जा सकता है। इससे प्रीमियम की रकम बढ़ सकती है, लेकिन आपकी ज़रूरत पूरी हो जाती है। इसलिए पॉलिसी की पूरी शर्तें ध्यान से पढ़ें और फिर सही निर्णय लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हाँ, IRDAI ने 1 अप्रैल 2024 से AYUSH उपचारों को भी कवर करने का निर्देश जारी किया है। इसमें कुछ शर्तें शामिल हो सकती हैं।

आपकी साधारण पॉलिसी के साथ आप मेटरनिटी का ऐड ऑन कवर ले सकते हैं। इसमें वेटिंग पीरियड हो सकता है।

हर कंपनी की अपनी पॉलिसी और शर्तें होती है। साथ ही ये वक़्त के साथ बदलती रहती है। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले ध्यान से पढ़ें।

सिर्फ वजन घटाने या कॉस्मेटिक कारणों से कराई गई बेरियाट्रिक सर्जरी कवर नहीं होती। लेकिन अगर मोटापा टाइप-2 डायबिटीज/हाई BP जैसी मेडिकल कंडिशन का कारण हो और डॉक्टर ने सलाह दी हो, तो शर्तों के अनुसार कवर मिल सकता है, पॉलिसी की शर्तें अवश्य पढ़ें।

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