हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम अस्वीकृति के सामान्य कारण

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हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के कारण और बचने के उपाय

 

हेल्थ इंश्योरेंस आपको बढ़ते इलाज के खर्चों और अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी से बचाने का सहारा देता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपका इंश्योरेंस क्लेम आखिरी पल में रिजेक्ट हो जाता है। इस इस वजह से आपको अनावश्यक तनाव झेलना पड़ सकता है और परिवार पर भी अस्पताल के खर्चों का बोझ आ सकता है। ऐसे हालात से बचने के लिए जान लीजिए कि हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम किन वजहों से अक्सर रिजेक्ट हो जाते हैं।

 

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या होता है?

 

जब हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाता है, तो इलाज का पूरा खर्च आपको खुद उठाना पड़ता है। इससे आपकी बचत खत्म हो सकती है या कर्ज बढ़ सकता है। बीमारी के समय यह आर्थिक ही नहीं, मानसिक तनाव भी उत्पन्न करता है और बार-बार रिजेक्शन से लोगों का बीमा कंपनियों पर भरोसा भी कम हो सकता है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने के 7 बड़े कारण

 

पूरी और सही जानकारी न देना: पॉलिसी लेते समय गलत या अधूरी जानकारी देना हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने का बड़ा कारण है। अगर आप अपनी मेडिकल हिस्ट्री, जीवनशैली की आदतें (जैसे धूम्रपान, शराब) या आय से जुड़ी जानकारी छुपाते हैं और क्लेम के समय बेमेल पाया जाता है, तो कंपनी आपका क्लेम रद्द कर सकती है।

वेटिंग पीरियड: हर हेल्थ पॉलिसी में कुछ बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड होता है। अगर इस अवधि के खत्म होने से पहले क्लेम किया जाए, तो आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा।

पॉलिसी एक्सक्लूजन: हर पॉलिसी में कुछ इलाज और बीमारियां कवर नहीं होतीं, जैसे कॉस्मेटिक सर्जरी, डेंटल ट्रीटमेंट या जन्मजात रोग। अगर ऐसी स्थिति में क्लेम किया जाए, तो वह रिजेक्ट हो जाता है।

पॉलिसी रिन्यू न करना: अगर आपकी पॉलिसी की अवधि समाप्त हो गई है और आपने उसे समय पर रिन्यू नहीं कराया है, तो कोई भी क्लेम स्वीकार नहीं किया जाएगा। यहाँ तक कि ग्रेस पीरियड के बाद भी पॉलिसी लैप्स हो सकती है।

गलत या अधूरे दस्तावेज़ जमा करना:  गलत या अधूरे दस्तावेज़ जमा करने पर भी क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। जैसे क्लेम फॉर्म में गलत जानकारी देना या जरूरी कागज़ात (बिल, रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी) न देना।

नेटवर्क अस्पताल से बाहर का इलाज: नेटवर्क से बाहर अस्पताल में इलाज कराने पर कैशलेस क्लेम नहीं मिलता। ऐसे में पहले आपको खुद भुगतान करना पड़ता है और रीइंबर्समेंट के लिए किए गए क्लेम के रिजेक्ट होने की संभावना रहती है।

बिना जानकारी दिए हॉस्पिटलाइजेशन: ज्यादातर पॉलिसियों में अस्पताल में भर्ती होने से पहले या 24 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचित करना जरूरी है। ऐसा न करने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचें?

 

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के कुछ नियम और कानून होते हैं। अगर आपने इन नियमों का पालन नहीं किया तो आपका क्लेम रिजेक्ट हो  सकता है।

 हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का अवश्य ध्यान रखें। 

पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें: पॉलिसी खरीदने से पहले उसके नियम और शर्तों, वेटिंग पीरियड, और एक्सक्लूजन को अच्छी तरह से समझ लें।

सही जानकारी दें: प्रपोजल फॉर्म में अपनी सभी मेडिकल कंडीशंस, आदतों और लाइफस्टाइल से जुड़ी सही जानकारी दें और कुछ भी छुपाएं नहीं।

दस्तावेजों को संभाल कर रखें: अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक के सभी मेडिकल बिल, रिपोर्ट और डॉक्टर के पर्चे की मूल प्रति संभाल कर रखें।

समय पर सूचित करें: किसी भी आपातकाल या नियोजित अस्पताल में भर्ती होने से पहले अपनी बीमा कंपनी को तुरंत सूचित करें।

नेटवर्क अस्पताल का उपयोग करें: कैशलेस सुविधा का लाभ उठाने के लिए हमेशा अपनी बीमा कंपनी के नेटवर्क अस्पताल में ही इलाज करवाएं।

 

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें?

 

अगर आपका क्लेम रिजेक्ट हो जाता है, तो घबराएं नहीं। आपके पास अभी भी कुछ विकल्प मौजूद हैं।

कारण जानें: सबसे पहले, बीमा कंपनी से क्लेम रिजेक्शन का कारण लिखित में मांगें।

गलती सुधारें: अगर रिजेक्शन का कारण अधूरा पेपरवर्क है, तो आप सही दस्तावेज जमा करके फिर से क्लेम फाइल कर सकते हैं।

बीमा कंपनी से संपर्क करें: बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी से बात करें और अपनी समस्या बताएं।

शिकायत दर्ज करें: अगर कंपनी कोई संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो आप IRDAI (भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण) के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

बीमा लोकपाल: अगर IRDAI में भी समाधान नहीं मिलता, तो आप बीमा लोकपाल से संपर्क कर सकते हैं, बीमा लोकपाल एक स्वतंत्र संस्था है जो बीमा विवादों का समाधान करती है।

 

निष्कर्ष

 

हेल्थ इंश्योरेंस मुश्किल वक्त में सहारा देने वाला भरोसा है। क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए पॉलिसी लेते समय पूरी और सही जानकारी दें, वेटिंग पीरियड और एक्सक्लूजन पढ़ें, अस्पताल में भर्ती होने पर समय पर कंपनी को सूचित करें और जरूरी दस्तावेज़ संभालकर रखें। इन बातों का ध्यान रखकर आप अपने हेल्थ इंश्योरेंस को सच में सुरक्षा कवच बना सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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