हेल्थ इंश्योरेंस में कौन कौन सी बीमारियां कवर होती हैं ? जानने योग्य बातें।
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी में मदद जरूर करती है, लेकिन इसमें कुछ शर्तें और सीमाएं होती हैं। कई बार कुछ बीमारियां इसमें शामिल होती हैं, जबकि कुछ बीमारियां कवर नहीं की जाती। ऐसे में जब लोगों को इन नियमों और शर्तों की पूरी जानकारी नहीं होती, तो हेल्थ इंश्योरेंस उनके लिए उलझन भरा साबित हो सकता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस में कौन कौन सी बीमारी आती है? हेल्थ इंश्योरेंस के कवरेज को अच्छी तरह समझना जरूरी है, ताकि आप इलाज के समय किसी भी परेशानी से बच सकें। कौन-कौन सी बीमारियां हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल नहीं होती, इसकी पूरी जानकारी पाने के लिए इस लेख को अवश्य पढ़ें।
हेल्थ इंश्योरेंस में कौन कौन सी बीमारियां कवर होती हैं
जब हम हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते हैं, तो सबसे पहला सवाल यह आता है कि आखिर हेल्थ इंश्योरेंस में कौन कौन सी बीमारी आती है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
- मधुमेह (Diabetes): हेल्थ इंश्योरेंस में टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह को कवर किया जाता है। बीते कुछ समय से, मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या काफ़ी तेज़ी से बढ़ रही है। भारत में हर 100 में से लगभग 11 लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। इससे हृदय, किडनी, नर्वस सिस्टम या अन्य अंग को नुक़सान पहुंच सकता है।
- कैंसर (Cancer): ये 200 से अधिक प्रकार के होते हैं और शरीर के किसी भी अंग में हो सकते हैं। इससे संक्रमित हर पाँच में से दो लोग ही बच पाते हैं। इसका इलाज़ भी काफ़ी महंगा हो सकता है। कुछ इंश्योरेंस कम्पनियां कैंसर जैसे जानलेवा बीमारियों के लिए खास प्लान ऑफर करती हैं।
- कार्डिएक रोग : बढ़ते स्ट्रेस और खराब डाइट के कारण हृदय रोगियों की संख्या काफ़ीतेजी से बढ़ रही है। भारत में हृदय रोग औसत 27% मृत्यु के लिए जिम्मेदार है। हेल्थ इंश्योरेंस में हृदय रोग जैसे दिल का दौरा, स्ट्रोक और उच्च रक्तचाप के लिए भी कवरेज दिया जाता है।
- चश्मा/मोतियाबिंद (Cataract): यह ज्यादातर बुजुर्गों में होने वाली आंख की बीमारी है जिसमें मरीज को धुंधला दिखाई देने लगता है। मोतियाबिंद एक आम रोग है और इसे हेल्थ इंश्योरेंस में कवर किया जाता है। इसे डे-केयर प्रक्रिया के तहत कवर किया जाता है।
- ऑटिज्म- यह एक मानसिक विकास से जुड़ी स्थिति है जिसमें बच्चे सामाजिक व्यवहार, भाषा या समझ में पिछड़ जाते हैं।
- क्रॉनिक किडनी डिज़ीज (पुरानी किडनी की बीमारी)- यह ऐसी स्थिति है जिसमें किडनी धीरे-धीरे खराब होती है और लंबे समय तक इलाज की ज़रूरत होती है, जैसे डायलिसिस।
- ब्रेन ट्यूमर- यह मस्तिष्क में गांठ या कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है, जो गंभीर और जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
- श्वसन या फेफड़ों की बीमारियाँ - जैसे अस्थमा (दम घुटना), निमोनिया (फेफड़ों में संक्रमण), और जब फेफड़े काम करना बंद कर दें।
- मानसिक और मनोवैज्ञानिक रोग - जैसे डिप्रेशन, चिंता, या बायपोलर जैसी मानसिक स्थितियां इनका इलाज, थेरेपी और डॉक्टर सलाह को कवर करती हैं।
- ऑटोइम्यून रोग- यह वो बीमारियां हैं जिनमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही शरीर पर हमला करती है – जैसे लुपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस।
- हाई ब्लड प्रेशर और अन्य पुरानी बीमारियां - इनका इलाज अधिकतर योजनाओं में होता है, लेकिन कुछ समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है, जिसे वेटिंग पीरियड कहते हैं। उसके बाद इलाज शुरू हो सकता है।
- जननांग और प्रजनन से जुड़ी समस्याएं - जैसे संतान न होना (इनफर्टिलिटी), जन्मजात बीमारियां, या गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं। कुछ विशेष योजनाओं में इन्हें कवर किया जाता है, सभी में नहीं।
- कोविड-19 - अगर किसी को कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो अधिकतर योजनाएं उसका खर्च देती हैं – जैसे दवाइयां, बेड चार्ज, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर आदि।
डे‑केयर एवं OPD भी कवर होती है
हेल्थ इंश्योरेंस डे‑केयर उपचारों को कवर करता है जो कि इस प्रकार हैं -
- मोतियाबिंद की सर्जरी
- कीमोथेरेपी (रासायनिक दवाओं द्वारा कैंसर का इलाज)
- रेडियोथेरेपी (किरणों द्वारा कैंसर का इलाज)
- डायलिसिस (गुर्दों की सफाई की प्रक्रिया)
- एंजियोग्राफी (रक्त धमनियों की जांच)
- साइनस की सर्जरी
- लिथोट्रिप्सी (किडनी या पित्त की पथरी तोड़ने की प्रक्रिया)
- यकृत से तरल निकालने की प्रक्रिया
- कोलोनोस्कोपी (बड़ी आंत की जांच)
- अपेंडिक्स निकालने की सर्जरी
- टॉन्सिल निकालने की सर्जरी आदि
हेल्थ इंश्योरेंस में क्या कवर नहीं होता
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय यह जानना जरूरी है कि कौन सी बीमारियां कवर नहीं होती हैं। आइए समझते हैं:
- कॉस्मेटिक सर्जरी:चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए किए जाने वाले ऑपरेशन जैसे कि Botox, लिपोसक्शन, नाक की सर्जरी कवर नहीं होते।
- धूम्रपान और शराब से होने वाली बीमारी:सिगरेट पीने से होने वाली फेफड़ों की बीमारी या शराब पीने से होने वाली लिवर की बीमारी कवर नहीं होती।
- डेंटल ट्रीटमेंट(उपचार):दांतों की समस्या, रूट कैनाल, या दांत निकलवाना आमतौर पर कवर नहीं होता।
- खुद को नुकसान पहुंचाना:जानबूझकर खुद को चोट पहुंचाना या आत्महत्या की कोशिश कवर नहीं होती।
- एडवेंचर स्पोर्ट्स:रॉक क्लाइंबिंग, बंजी जंपिंग जैसे खतरनाक खेलों में लगी चोट कवर नहीं होती।
निष्कर्ष
हेल्थ इंश्योरेंस कई बीमारियों का इलाज कवर करता है, लेकिन कुछ स्थितियाँ इससे बाहर होती हैं। जैसे, पहले से मौजूद बीमारियां (जैसे हार्ट रोग, डायबिटीज़) शुरुआत में 1 से 4 साल तक कवर नहीं होतीं।
कैंसर और हृदय रोग के लिए कुछ खास प्लान होते हैं जो सिर्फ उन्हीं बीमारियों को कवर करते हैं। इसलिए पॉलिसी लेते समय "एक्सक्लूज़न लिस्ट (अपवर्जन सूची)" ज़रूर पढ़ें।
एक अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी से इलाज की चिंता काफी हद तक कम हो जाती है।