स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी क्या है?
पुरानी फिल्मों में आपने जरूर देखा होगा, अस्पताल में बीमार माँ जिंदगी और मौत के बीच झूल रही होती है, और हीरो पैसों के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा होता है। कोई मदद नहीं करता, और जब सारी उम्मीदें टूटने लगती हैं, तभी अचानक कोई शुभचिंतक आकर अस्पताल का सारा बिल चुका देता है। मां ठीक हो जाती है, और परिवार में फिर से खुशियां लौट आती हैं। सोचिए, क्या आज के समय में ऐसा कोई शुभचिंतक होगा?
हां, है! और उसका नाम है- हेल्थ इंश्योरेंस। जानते हैं कि बीमा क्या है हिंदी में।
हेल्थ इन्शुरन्स क्या है?
जब मुश्किल वक्त आए, जब बीमारी दस्तक दे और जेब जवाब देने लगे, ऐसे समय में हेल्थ इंश्योरेंस ही वो मददगार होता है जो बिना सवाल किए आपका साथ देता है। ये सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपकी और आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा की एक मजबूत ढाल है।
हेल्थ इंश्योरेंस क्या है, इसका सरल जवाब यह है कि हेल्थ इंश्योरेंस एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट है जिसमें आप एक कंपनी में हर महीने या सालाना कुछ रकम जमा करते हैं और बदले में कंपनी आपके मेडिकल खर्चों को भरने का वादा करती है।
हेल्थ इंश्योरेंस में ऐड-ऑन सुरक्षा क्या होते हैं?
कई बार अस्पताल का खर्च हमारी उम्मीद से ज़्यादा निकल आता है। या फिर कुछ चीजों का खर्च आपको अपने जेब से देना पड़ जाता है क्योंकि ये बीमा में शामिल नहीं था। ऐसे में नई पॉलिसी लेने की जगह आप अपनी चालू पॉलिसी में एक "एडिशनल" कवर जोड़ सकते हैं जैसे क्रिटिकल इलनेस कवर, मटर्निटी कवर, OPD केयर कवर आदि। इससे एक पॉलिसी में आपकी ज़रूरत पूरी होगी। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले हमेशा इस बात का ध्यान रखें की आपकी पॉलिसी क्या कवर कर रही है और क्या नहीं।
हेल्थ इंश्योरेंस के प्रकार
अब तक आप समझ चुके होंगे कि चिकित्सा बीमा क्या होता है। अब इस बात पर गौर करें कि हर इंसान की जरूरतें अलग होती हैं। जैसे कोई अकेला रहता है, कोई परिवार के साथ, कोई पहले से बीमार है या कोई माँ बनने वाली है। ऐसे में एक ही तरह का हेल्थ इंश्योरेंस सभी के लिए फिट नहीं हो सकता। इसी वजह से अलग-अलग प्रकार की हेल्थ पॉलिसी बनाई गई हैं। आइए जानें इन विभिन्न स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के बारे में-
- इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस- आप नाम से समझ गए होंगे ये सिर्फ एक व्यक्ति के लिए है। ये उसी इंसान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जिसके नाम की पॉलिसी ली गई है। ये 18 साल से ऊपर के लोग ले सकते हैं।
- फैमिली फ्लोटर हेल्थ बीमा-इस इंश्योरेंस में पूरे परिवार को कवर किया जाता है मतलब आप, आपका पार्टनर और बच्चे। कुछ पॉलिसीज़ में माता पिता भी शामिल हो सकते हैं। अगर आपका सम इन्शुर्ड 10 लाख है तो एक व्यक्ति पर 4 लाख खर्च होने पर बाकी लोग बचे हुए 6 लाख का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- सीनियर सिटिज़न हेल्थ इंश्योरेंस-ये बीमा खासकर ये 60 की उम्र के ऊपर के लोगों के लिए बनाया गया है। बुजुर्गों की जरूरतें अलग होती हैं। कई बार वो अकेले रह जाते हैं ऐसे में उनके लिए बनाया ये इंश्योरेंस काफ़ी मददगार साबित होता है।
- क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस-बड़ी बीमारियाँ जैसे कैंसर, दिल से जुड़ी बीमारियाँ, किड्नी फैल्यर, डायबिटीज इन्हें कवर करने के लिए खास बीमा बनाया गया है। आजकल ऐसी बीमारियाँ कम उम्र में भी होनी लगी है इसलिए ये सभी को लेना चाहिए। खासकर उन्हें जिनके परिवार में किसी को ये बीमारियां हो चुकी हों।
- ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस-ये अक्सर किसी कॉर्पोरेट कंपनी, सोसाइटी या एसोसिएशन द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए लिया जाता है। कुछ प्लांस में कर्मचारियों के पार्टनर भी शामिल हो सकते हैं। इससे प्रीमियम कम पड़ता है और हर इंसान की अलग पॉलिसी की झंझट नहीं रहती।
- मटर्निटी हेल्थ इंश्योरेंस-इसे अलग से या फिर ऐड-ऑन के तौर पर भी लिया जा सकता है। इसमें गर्भावस्था से जुड़े सभी खर्च शामिल होते हैं। कुछ बीमा योजनाएँ दो गर्भधारणाओं के लिए कवरेज देती है। इसमें नवजात शिशु के शुरुआती खर्च जैसे टीकाकरण भी शामिल होते हैं।
- हॉस्पिटल डेली कैश- कुछ छोटे मोटे खर्च कई बार पॉलिसी में शामिल नहीं होते हैं। ऐसे में बीमा कंपनी एक निश्चित रकम आपको अस्पताल में भर्ती होने पर हर दिन देती है। इसमें खाना, रूम का किराया, आना जाना जैसे गैर-चिकित्सकीय खर्चशामिल होते हैं।
- यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP)- ये एक अलग तरह का प्लान है जिसमें आपके प्रीमियम का एक हिस्सा बीमा के लिए होता है और दूसरा हिस्सा एक निवेश के तौर पर। इससे आपको ज़रूरत पड़ने परहेल्थ इंश्योरेंस का फ़ायदा तो मिलता ही है साथ ही आपको निवेश से अच्छे लाभ भी मिलते हैं।
- पर्सनल एक्सीडेंट कवर-अगर दुर्घटना में किसी की मृत्यु हो जाए या किसी तरह से विकलांग हो जाए तो कंपनी एक निश्चित रकम देती है।
- मेडिक्लेम इंश्योरेंस प्लान- अगर कोई कम से कम 24 घंटों के लिए अस्पताल में भर्ती होता है तब उसके भर्ती होने का खर्च कंपनी देती है। इसमें ओपीडी या छोटी बीमारी जिसमें अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया है वो कवर नहीं होता।
IRDAI अपडेट्स
IRDAI ने कुछ ज़रूरी बदलाव किए हैं, जो आपके लिए जानना महत्वपूर्ण है:
- उम्र सीमा हट गई है और मोरेटोरियम पीरियड 5 साल का हो गया है।
- पहले से हुई बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड अब घटकर 3 साल हो गया है।
- ऑनलाइन डॉक्टर की सुविधा ज़रूरी बताई गई है।
- AYUSH इलाजों पर कोई सब-लिमिट नहीं।
- हृदय रोग, कैंसर, किडनी फेलियर, एचआईवी/एड्स जैसी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को बीमा देने सेबीमा कंपनी सीधे तौर पर इनकार नहीं कर सकती।
निष्कर्ष
बीमारियाँ कभी बता कर नहीं आती लेकिन कई बार हम खुद उन्हें बुलावा ज़रूर भेजते हैं। अपनी गलत आदतों या गलत रहन सहन से। इसलिए दोनों तरफ से हमें खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखना ज़रूरी हो गया है। पहले खुद ही अच्छा खाएं- पिएं, साफ सुथरे रहें और दूसरा, हेल्थ इंश्योरेंस लें। सबसे ज़रूरी अपने करीबियों को समझाएँ की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी क्या है।