हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि क्या होती है?

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हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि को समझना क्यों जरूरी है?

 

हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि एक ऐसा नियम है जो तय करता है कि पॉलिसी लेने के बाद कुछ बीमारियों का कवर कब से शुरू होगा। इसे ज्यादातर लोग पॉलिसी लेते समय नजरअंदाज कर देते हैं जो आगे चलकर उनके दावे के अस्वीकृत होने का कारण बनता है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस की प्रतीक्षा अवधि के बारे में अक्सर इंश्योरेंस एजेंट भी साफ-साफ नहीं बताते। लेकिन चिंता मत कीजिए, इस लेख में आपको इसके बारे में विस्तार से जानने को मिलेगा ताकि आपको क्लेम करते वक्त किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि क्या है?

 

यह अवधि पूरी होने के बाद ही आप क्लेम फाइल कर सकते हैं। प्रतीक्षा अवधि के दौरान, भले ही आपकी पॉलिसी किसी बीमारी को कवर करती हो, फिर भी उस बीमारी के लिए दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

 

जैसे ही आपकी पॉलिसी शुरू होती है, आमतौर पर पहले 30 दिन तक आप क्लेम नहीं कर सकते, कुछ बीमारियों के लिए, यह अवधि 3 साल तक हो सकती है। हालांकि, अगर अचानक एक्सीडेंट या चोट की वजह से आपको 24 घंटे से ज़्यादा हॉस्पिटल में रहना पड़े, तो आप क्लेम कर सकते हैं। हर पॉलिसी में प्रतीक्षा अवधि की समय सीमा अलग होती है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस में सर्वाइवल पीरियड क्या है?

 

सर्वाइवल पीरियड एक प्रतीक्षा अवधि होती है जिसमें गंभीर बीमारी जैसे कि कैंसर, हार्ट अटैक, या किडनी फेलियर के इलाज के बाद, पॉलिसी के तहत क्लेम पाने के लिए कम से कम 14 से 60 दिनों तक जीवित रहना जरूरी होता है।

 

यह अवधि केवल गंभीर बीमारियों वाली पॉलिसी (क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी) पर लागू होता है। हर पॉलिसी में यह समय सीमा अलग-अलग हो सकती है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि के प्रकार 

 

हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि के कई प्रकार होते हैं, जो पॉलिसी शुरू होने के बाद क्लेम करने की सुविधा से जुड़े होते हैं जैसे:

 

  • शुरुआती प्रतीक्षा अवधि:लगभग सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में आप पॉलिसी खरीदने के बाद एक्सीडेंट केस के अलावा किसी भी मामले में 30 दिनों तक क्लेम नहीं कर सकते।
  • पहले से मौजूद बीमारी (पीईडी) के लिए प्रतीक्षा अवधि:अगर आपको कोई बीमारी पहले से है, जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, या थायरॉइड, आदि और उसका इलाज पॉलिसी खरीदने के 36 महीने पहले से चल रहा हो, तो उस बीमारी के लिए आप 6 महीने से लेकर 3 साल तक के बाद ही क्लेम कर सकते हैं।
  • मैटरनिटी कवर प्रतीक्षा अवधि:अगर आप मां बनने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो डिलीवरी और बच्चे के इलाज के खर्च के लिए कुछ हेल्थ इंश्योरेंस में 2 से 3 साल पहले से पॉलिसी लेनी होगी।
  • कुछ खास बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि:ऑस्टियोपोरोसिस, किडनी की पथरी, मोतियाबिंद, हर्निया, सर्जरी और ईएनटी संबंधी कुछ बीमारियों के लिए अलग से 24 महीने की प्रतीक्षा अवधि होती है, जो हर पॉलिसीधारक के लिए अलग अलग होती है।
  • एक्सीडेंटल क्लेम के लिए प्रतीक्षा अवधि:दुर्घटना या चोटों के मामलों में ज्यादातर पॉलिसियों में प्रतीक्षा अवधि नहीं होती, यानी तुरंत क्लेम किया जा सकता है।

 

हेल्थ इंश्योरेंस की प्रतीक्षा अवधि से जुड़ी जरूरी बातें 

 

हेल्थ इंश्योरेंस की प्रतीक्षा अवधि से जुड़ी कुछ जरूरी बातों का आपको पता होना चाहिए जो इस प्रकार हैं:

 

  • अगर आप अपना इंश्योरेंस कंपनी बदल रहे हैं तो आईआरडीएआई के नियमों के मुताबिक आपकी पुरानी पॉलिसी में जो वेटिंग पीरियड पूरी हो चुकी है वह नई पॉलिसी में भी मान्य होगी। यानी आपको फिर से नई वेटिंग पीरियड दोबारा पूरी करने की आवश्यकता नहीं होती।
  • हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय पहले से मौजूद बीमारियों का विवरण देना जरूरी होता है वरना क्लेम के वक्त दिक्कत आ सकती है या क्लेम रिजेक्ट भी हो सकता है।
  • पहले से मौजूद बीमारियों के लिए अधिकतम प्रतीक्षा अवधि 3 वर्षों तक हो सकती है।
  • सभी कंपनियों और पॉलिसियों के कवरेज के लिए प्रतीक्षा अवधि अलग अलग होती है। इसलिए, पॉलिसी खरीदने से पहले इसकी जांच जरूर करें।

 

निष्कर्ष 

 

किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को खरीदने से पहले उसकी प्रतीक्षा अवधि के बारे में जानकारी लेना बेहद जरूरी है, वरना क्लेम के समय आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। चाहे वह शुरुआती 30 दिन की वेटिंग पीरियड हो, पहले से मौजूद बीमारियों के लिए 3 साल का इंतज़ार हो, या मैटरनिटी कवर के लिए 2-3 साल की प्रतीक्षा अवधि, हर नियम का पालन करना आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

 

इसके अलावा, एजेंट की बातों पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय, पॉलिसी की शर्तों को खुद पढ़ें और समझें। थोड़ी सी सतर्कता आपको भविष्य में हजारों रुपये और गंभीर परेशानियों से बचा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

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