हर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी, IRDAI के नियमों के अनुसार, अपनी पॉलिसी में एक्सक्लूज़न की सूची देती है। अगर अस्पताल में भर्ती की वजह किसी ऐसी बीमारी से जुड़ी हो जो इस सूची में है, तो बीमा कंपनी क्लेम मंजूर नहीं करेगी। इसलिए हेल्थ प्लान लेने से पहले एक्सक्लूज़न की सूची ध्यान से जरूर पढ़ें।
एक्सक्लूज़न यानी वे खर्चे या इलाज जो इंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करती। इन्हें जानना जरूरी है क्योंकि –
हेल्थ इंश्योरेंस मेडिकल खर्च कवर करता है, लेकिन कुछ इलाज, सर्जरी या हॉस्पिटलाइजेशन को बीमा कंपनियां कवर नहीं करतीं, इन्हें एक्सक्लूज़न कहा जाता है-
फेसलिफ्ट, लिपोसक्शन और इस प्रकार की प्लास्टिक सर्जरी लोग अपनी पसंद से करते हैं। इसलिए इनका खर्च कंपनी नहीं उठाएगी। यह केवल तब कवर हो सकता है अगर किसी दुर्घटना में रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की ज़रूरत हो।
एक्सपेरिमेंट या ट्रायल के तौर पर की गई सर्जरी को भी कवर नहीं किया जाएगा।
जब तक इनसे जुड़े इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने की ज़रूरत ना हो, इनका खर्च कवर नहीं होगा।
IVF, सरोगेसी, अपनी इच्छा से किया गया अबॉर्शन, ये खर्च कवर नहीं किए जाते हैं। कुछ पॉलिसी में मटर्निटी बेनेफिट लेने केलिए अलग से ऐड ऑन राइडर लेना होता है।
कॉस्मेटिक की तरह ही ये इलाज अपनी इच्छा से किया जाता है। इसलिए इसका खर्च भी कवर नहीं किया जाता।
AIDS, HIV, सिफलिस, हेपेटाइटिस जैसे संक्रामित रोगों का खर्च कई इंश्योरेंस कंपनियाँ नहीं उठाती।
आमतौर पर रूटीन टेस्ट जैसे ब्लड टेस्ट, डायबिटीज टेस्ट, इनका खर्च हेल्थ इंश्योरेंस में कवर नहीं होता। लेकिन अगर इनकी ज़रूरत किसी बीमारी के इलाज के लिए है या हॉस्पिटल में भर्ती होने पर ज़रूरी है तो इनका खर्च कवर जरूर होगा।
अगर आप पैराजंपिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, माउंटेनियरिंग, स्काईडाइविंग, डीप-सी डाइविंग जैसे स्पोर्ट्स के शौकीन है तो ये जान लें कि इनमें भाग लेने पर होने वाली चोट या बीमारी का खर्चइंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करती।
अगर आपकी अपनी गलत आदतों के चलते आपको कोई बीमारी हो तो उसका इलाज बीमा कंपनी कवर नहीं करेगी। जैसा मोटापा, शराब या तंबाकू से होने वाले कैंसर भी इसमें शामिल हैं।
इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन का खर्च तो सभी पॉलिसी करती ही है लेकिन कुछ पॉलिसियों में आउटपेशेंट मतलब जब हॉस्पिटल भर्ती होने की ज़रूरत ना हो तो वो खर्च कवर नहीं होंगे। जैसे डॉक्टर से कंसल्टेशन, प्रिस्क्रिप्शन दवाइयाँ, अस्पताल से बाहर टांके लगवाना।
जन्म से ही विकलांग या जन्म से ही जुड़ी बीमारियों का खर्च बीमा कंपनी अक्सर कवर नहीं करती। ये बीमारियाँ जैसे दिल की बीमारी, शरीर के किसी अंग में गड़बड़ी, एक्स्ट्रा त्वचा का बनना, इत्यादि।
हॉस्पिटल में भर्ती होने पर कई चीजों का इस्तेमाल होता है जैसे सिरिंज, कॉटन, पट्टियाँ, सैनिटाइज़र, मास्क। इन सभी का पैसा अक्सर आपको अपनी जेब से ही भरना होता है। इससे बचने के लिए आप कन्ज़्यूमेबल कवर नाम का ऐड ऑन ले सकते हैं।
खुद को चोट पहुंचाना जैसे आत्महत्या, शराब और नशे में हुई दुर्घटनाएं, इन सभी से जुड़े इलाज कोई इंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करेगी।
पॉलिसी लेने से पहले अगर कोई बीमारी है तो उसके लिए वेटिंग पीरियड होता है। उसके खत्म होने के बाद ही कवरेज शुरू होता है।
इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम लोगों की ज़रूरत को देखते हुए तय किया जाता है। इसलिए इसमें सभी इलाज शामिल नहीं किए जा सकते। कुछ खर्चों के लिए बिल्कुल कवरेज नहीं होता, जबकि कुछ इलाजों या खर्चों के लिए अलग से ऐड-ऑन कवर लिया जा सकता है। इससे प्रीमियम की रकम बढ़ सकती है, लेकिन आपकी ज़रूरत पूरी हो जाती है। इसलिए पॉलिसी की पूरी शर्तें ध्यान से पढ़ें और फिर सही निर्णय लें।